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WhatsApp पर हो रही थी तेंदुए की खाल की डील, DRI और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में उज्जैन से वन्यजीव तस्करी का बड़ा भंडाफोड़; उज्जैन के होटल से 21 करोड़ की तेंदुए की खाल बरामद, दो तस्कर गिरफ्तार
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
उज्जैन में वन्यजीव तस्करी के एक सनसनीखेज मामले का खुलासा हुआ है। डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) नागपुर यूनिट और उज्जैन वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में दो तेंदुओं की खालें (सिर सहित) और एक जंगली सूअर के दांत जब्त किए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी अनुमानित कीमत 21 करोड़ रुपए आंकी गई है। इस बड़ी सफलता के साथ ही दो वन्यजीव तस्करों को गिरफ्तार भी किया गया है। दोनों आरोपी वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए दुर्लभ वन्यजीव अंगों की अवैध खरीद-फरोख्त का सौदा कर रहे थे।
सूत्रों के अनुसार, 4 मई की सुबह उज्जैन के एक होटल में छापा मारा गया। यह कार्रवाई बेहद गुप्त तरीके से की गई, जहां डीआरआई और वन विभाग की टीम ग्राहक बनकर पहले होटल पहुंची। जैसे ही सौदे की पुष्टि हुई, मौके पर दबिश देकर आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ा गया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में शैलेंद्र व्यास निवासी विजय नगर, इंदौर और किशोर जैन निवासी उज्जैन शामिल हैं। उनके पास से दो तेंदुओं की पूरी खाल (सिर सहित) और एक जंगली सूअर का दांत बरामद किया गया।
इस संबंध में वन विभाग के एसडीओ कैलाश भधकरे ने जानकारी दी कि तेंदुआ वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के तहत शेड्यूल-1 प्रजाति में शामिल है, जिसका कोई भी अंग रखना, खरीदना या बेचना पूरी तरह से प्रतिबंधित और गैरकानूनी है। जंगली सूअर के दांत पर भी यही कानून लागू होता है।
पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने चौंकाने वाला दावा किया कि यह खालें उन्हें उनके पिता के पास विरासत में मिली हैं और उन्हें वर्ष 1970 में किसी “महाराज” ने दान में दी थीं। लेकिन वे इस संबंध में कोई दस्तावेज या प्रमाण नहीं दिखा पाए।
गिरफ्तारी के बाद दोनों तस्करों को 5 मई को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 18 मई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। जब्त की गई खाल और अन्य सामग्री को वन विभाग के हवाले कर दिया गया है और अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की विस्तृत जांच उज्जैन वन मंडल कर रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम से वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी एजेंसियों में हड़कंप मच गया है और माना जा रहा है कि इस रैकेट के तार अन्य राज्यों और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से भी जुड़े हो सकते हैं। उज्जैन जैसे शांत शहर में इतनी बड़ी वन्यजीव तस्करी का खुलासा प्रशासन और नागरिकों दोनों के लिए आंखें खोलने वाला है।